अमृतमाला – पाठ 7, नीतिश्लोकाः 1 Amritmala: Shlokas from Chanakya

https://youtu.be/eqxjGpSNtLY

अमृतमाला के इस पाठ में हम कुछ नीति के श्लोक पढ़ेंगे। ये हमें संस्कृत सीखाने में तो सहायक होंगे ही, साथ ही साथ, ये श्लोक हमें नीति का ज्ञान भी देंगे। इन श्लोकों को चाणक्य नीति से लिया गया है। चाणक्य नीति विष्णुगुप्त चाणक्य द्वारा रचित एक महान नीति ग्रंथ है। चाणक्य नीति में नीति, व्यवहार व राजनीति की शिक्षा देने वाले अनेक श्लोक हैं। इस पाठ में हम वर्ण की गणना करना भी सीखेंगे।

श्लोक कैसे बनता है?

श्लोक में वर्ण कैसे गिनते हैं?

अनुष्टुप छंद को भी हम देखेंगे।

अधनाः धनं इच्छन्ति वाचं चैव चतुष्पदाः

मानवाः स्वर्गमिच्छन्ति मोक्षमिच्छन्ति देवताः।।

यो ध्रुवाणि परित्यज्य अध्रुवम् परिषेवते।

ध्रुवाणि तस्य नश्यन्ति अध्रुवम् नष्टम् एव हि।।

एकाकिना तपः द्वाभ्याम् पठनम् गायनम् त्रिभिः।

चतुर्भिः गमनम् क्षेत्रम् पंचभिः बहुभिः रणः।।

अतिरूपेण वै सीता अतिगर्वेण रावणः ।

अतिदानात् बलिः बद्धः अति सर्वत्र वर्जयेत् ।।

In the present lesson of the Sanskrit literature course, Amritmala, today we are going to study a few Sanskrit shlokas. These Sanskrit shlokas give us the knowledge of the strategy and ethics. These Sanskrit shlokas have been derived from the famous work of the ancient Indian scholar and politician, Vishnugupta Chanakya. The work is called – Chanakya Neeti. We will also learn to calculate the value of a Sanskrit syllable in a given Sanskrit shloka. We will see what a syllable is and how these syllables are combined to form a Sanskrit shloka.

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