अमृतमाला – पाठ 6, सरस्वती वंदना मंत्र 2 Amritmala: Sarasvati Vandana Mantra

अमृतमाला के इस पाठ में हम दूसरा सरस्वती मंत्र पढ़ेंगे। यह मंत्र भी देवी सरस्वती की महिमा को गाता है। माँ सरस्वती वीणावादिनी हैं, कमलासना हैं, अज्ञान रूपी अंधकार का नाश करने वाली हैं। मंत्रों में अपार शक्ति होती है, मंत्र जाप से सरस्वती माँ प्रसन्न होकर विद्या का वरदान देती हैं। मां सरस्वती को विद्या और कला की देवी माना जाता है। भारत में संगीतकारों से लेकर वैज्ञानिकों तक हर कोई ज्ञान-प्राप्ति और मार्गदर्शन के लिए मां सरस्वती देवी से पूजा-प्रार्थना करता है। मां सरस्वती के भक्तगण सौभाग्य-प्राप्ति के लिए हर सुबह सरस्वती वंदना मंत्र का पठन करते हैं। आप इस बात से हैरान हो जाएंगे, कि यह मंत्र आपको बहुत ही आसानी से संस्कृत भाषा में आगे बढ़ा देगी और आपको संस्कृत का अध्ययन बहुत रुचिकर और सरल प्रतीत होने लगेगा।

शुक्लाम् ब्रह्मविचार सार परमाम् आद्यां जगद्व्यापिनीम्।

वीणा-पुस्तक-धारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम्‌॥

हस्ते स्फटिकमालिकाम् विदधतीम् पद्मासने संस्थिताम्‌।

वन्दे ताम् परमेश्वरीम् भगवतीम् बुद्धिप्रदाम् शारदाम्‌॥2॥

This lesson is going to explain the second Sarasvati Mantra. The mantra is also a tribute to the Goddess of Knowledge. She plays on veena, sits on a lotus and destroys the ignorance of her devotees. The mantras have infinite power, if chanted with due devotion, the mantras can open the door to the gods. The viewer will be amazed with the simplicity of the language.

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