An Ideal Student Amritmala 2 | विद्यार्थी पंचलक्षणम्

This is the second lesson in the Sanskrit literature course, Amritmala. The lessen explains an Ideal Student two Sanskrit shlokas from Mahabharat, that give an insight in the essential qualities of a good students.

Ideal Student

A good student has very acute senses. His actions are as quick as that of a crow, his balance of mind and body like that of a crane, his sleep as deep as that of a dog, his eating habits regular and he never worries about the ordinary things. His sole motto being – the gaining of the knowledge.

A student who desires for the knowledge, should give up the pleasures. If he cannot give up the pleasures, then he should give up the hope for learning. The viewer will be amazed with the simplicity of the language.

Also read simple story about a king in simple Sanskrit language. You will be amazed with the simplicity of the language.

अमृतमाला के इस पाठ में हम महाभारत से लिए गए दो संस्कृत श्लोक पढ़ेंगे।

ये विद्यार्थी के गुण बताते हैं। एक उत्तम विद्यार्थी के क्रिया कलाप कौवे की तरह सजग, उसकी नींद कुत्ते की तरह, उसका ध्यान बगुले की तरह, उसका भोजन अल्प और उसकी रूचि गृह कार्य में अधिक नहीं होनी चाहिए। जो सुख चाहता है, उसे विद्या त्याग देनी चाहिए और जो विद्यार्थी विद्या चाहता है, उसको सुख की सारी आशा त्याग देनी चाहिए।

आप इस बात से हैरान हो जाएंगे, कि यह कहानी आपको बहुत ही आसानी से संस्कृत भाषा में आगे बढ़ा देगी और आपको संस्कृत का अध्ययन बहुत रुचिकर और सरल प्रतीत होने लगेगा।

काक चेष्टा, बको ध्यानं, स्वान निद्रा तथैव च ।

अल्पहारी, गृहत्यागी, विद्यार्थी पंच लक्षणं ॥

सुखार्थी चेत् त्यजेत विद्याम् , विद्यार्थी चेत् त्यजेत सुखम् ।

सुखार्थिनः कुतो विद्या , विद्यार्थिनः कुतो सुखम् ।।

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