Sanskrit Paheliyan Amritmala 13 | पहेलियाँ 2

The present lesson of the Sanskrit literature series, Amritmala presents some interesting riddles of Sanskrit also called Paheliya.

Paheliyan in Sanskrit

These riddles give a working practice in Sanskrit grammar and increases the Sanskrit vocab of the beginners as well.

अमृतमाला के इस पाठ में हम विभिन्न संस्कृत ग्रन्थों से ली गई पहेलियों का का अध्ययन करने जा रहे हैं।

ये पहेलियां संस्कृत मे रूचि तो बढ़ाती ही हैं साथ ही राजनीति, लोकनीति और व्यवहार नीति का ज्ञान देने वाली हैं।

संस्कृत व्याकरण के अभ्यास की दृष्टि से भी ये बड़ी सरल, सुगम व रुचिकर हैं, और इनको बड़ी सरलता से कंठस्थ भी किया जा सकता है।

अमृतमाला के पिछले अध्याय मे हमने संस्कृत मे पहेलियाँ श्रवण की, आज इसी क्रम मे आगे बढ़ते हुए हम संस्कृत प्रहेलिका भाग 2 का अध्ययन करेंगे।

कृष्णमुखी न मार्जारी द्विजिह्वा न च सर्पिणी।

पंचभर्ता न पांचाली यः जानाति सः पण्डितः॥

कस्तूरी जायते कस्मात् कः हन्ति करिणां कुलम्।

किं कुर्यात् कातरः युद्धे मृगात् सिंहः पलायते ।।

गिरिः अस्ति न तु प्रस्तरः वनम् अस्ति न तु पादपः।

नगरम् अस्ति तु निर्जनः नदी अस्ति तु निर्जलः ।।

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